Bihar Bhumi (बिहारभूमि) 2026: जमाबंदी देखें, दाखिल-खारिज, भू-लगान, नक्शा और मापी की पूरी गाइड

ऑनलाइन सेवाएँ सालभर चालूअंतिम जाँच: 9 अक्टूबर 2026

Bihar Bhumi (बिहारभूमि) बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग का आधिकारिक पोर्टल है। जमाबंदी देखना, दाखिल-खारिज, भू-लगान भरना, नक्शा, जमीन की मापी, भूमि दखल-कब्ज़ा प्रमाण पत्र (LPC) और जमाबंदी की गलती सुधारना: ये सब काम अब ऑनलाइन होते हैं। बिहार के रैयत लोग ध्यान दें: इस लेख में हर सेवा का तरीका, ज़रूरी कागजात, शुल्क और समय-सीमा (जहाँ आधिकारिक रूप से मिली), और आम परेशानियों का हल एक जगह दिया गया है।

यह जानकारी विभाग की आधिकारिक पुस्तिका “बिहारभूमि: ऑनलाइन सेवाओं के बारे में जानकारी” (पोर्टल पर V1.1 नाम से रखी है), पोर्टल के FAQ पन्नों, संबंधित सरकारी पोर्टलों के अपने पन्नों और बिहार भूमि दाखिल-खारिज अधिनियम, 2011 के राजपत्र-पाठ से मिलाकर लिखी गई है। पोर्टल का होम पेज और FAQ 9 अक्टूबर 2026 को देखे गए। जो बात सिर्फ़ खबरों में मिली, उसे अलग से साफ़ लिखा गया है।

एक नज़र में: Bihar Bhumi

आधिकारिक पोर्टल biharbhumi.bihar.gov.in
विभाग राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहार सरकार
लॉगिन मोबाइल नंबर से रजिस्ट्रेशन और लॉगिन। जमाबंदी देखने जैसी “सूचना” वाली सुविधाओं के लिए लॉगिन नहीं चाहिए
दाखिल-खारिज का शुल्क पोर्टल के FAQ में “पूर्णतः निःशुल्क” (9 अक्टूबर 2026 को देखा)। जुलाई 2026 में ₹200 शुल्क वाला संशोधन विधेयक विधानसभा से पास हुआ है; पूरी बात यहाँ है
दाखिल-खारिज में समय आपत्ति न आए तो 35 कार्य-दिवस, आपत्ति आए तो 75 कार्य-दिवस (पोर्टल का FAQ)
दाखिल-खारिज की आवेदन-सीमा जमीन पर अधिकार मिलने के 90 दिन के भीतर; देर हो तो विलंब माफी याचिका साथ में
जमीन की मापी (ई-मापी) प्रति खेसरा: ग्रामीण ₹500, शहरी ₹1000। तत्काल मापी में ग्रामीण ₹1000, शहरी ₹2000
भू-संपरिवर्तन शुल्क खेतिहर जमीन के बाजार मूल्य का 10% (भू-संपरिवर्तन FAQ)
तकनीकी समस्या Raise a Ticket पर शिकायत दर्ज कीजिए

Bihar Bhumi पर मिलने वाली सेवाएँ

पोर्टल के होम पेज पर 10 “सेवाएँ” और कई “सूचनाएँ” हैं (9 अक्टूबर 2026 को देखा)। सेवाओं के लिए अपने मोबाइल नंबर से लॉगिन कीजिए; नए हैं तो पहले रजिस्ट्रेशन।

लॉगिन से मिलने वाली सेवाएँ

  • ऑनलाइन दाखिल-खारिज: जमीन खरीद, दान, बंटवारा या विरासत के बाद जमाबंदी में नाम चढ़वाना।
  • भू-लगान भुगतान: जमाबंदी का लगान ऑनलाइन भरना।
  • डिजिटल हस्ताक्षरित भू-अभिलेख: खतियान, जमाबंदी पंजी जैसे रिकॉर्ड की हस्ताक्षरित कॉपी।
  • ई-मापी: अंचल अमीन से रैयती जमीन की मापी।
  • परिमार्जन प्लस: जमाबंदी की गलती सुधारना या छूटी हुई जमाबंदी ऑनलाइन कराना।
  • ऑनलाइन राजस्व न्यायालय (RCMS): राजस्व न्यायालयों में केस दायर करना।
  • भू-संपरिवर्तन: खेतिहर जमीन का उपयोग गैर-खेतिहर काम में बदलवाना।
  • राजस्व नक्शे की डोर-स्टेप डिलीवरी: छपा हुआ प्रमाणित नक्शा डाक से घर पर।
  • जमाबंदी पर SMS अलर्ट: जमाबंदी या खेसरा में बदलाव की सूचना मोबाइल पर।
  • भूमि दखल-कब्ज़ा प्रमाण पत्र (LPC): सरकारी लाभ या लोन के लिए।

बिना लॉगिन देखी जाने वाली सूचनाएँ

  • जमाबंदी पंजी (होम पेज पर 22 भारतीय भाषाओं में देखने का अलग लिंक भी है)
  • दाखिल-खारिज, LPC और परिमार्जन प्लस आवेदन की स्थिति
  • जमाबंदी पर बंधक (mortgage) की जानकारी
  • भू-नक्शा (राजस्व मानचित्र)
  • जमाबंदी की मोबाइल/आधार सीडिंग स्थिति
  • विशेष सर्वेक्षण से जुड़ी सेवाएँ
  • राजस्व न्यायालय के केस की स्थिति और cause-list

रजिस्ट्रेशन और लॉगिन: पहले यही कीजिए

  1. biharbhumi.bihar.gov.in खोलिए और “नागरिक लॉगिन” पर क्लिक कीजिए।
  2. “Registration” बटन दबाइए।
  3. Registration Form भरकर “Register Now” दबाइए। फॉर्म में दिए मोबाइल नंबर पर OTP आएगा।
  4. OTP भरकर Submit कीजिए। रजिस्ट्रेशन पूरा हो गया; अब उसी मोबाइल नंबर से लॉगिन कीजिए।

ई बात ध्यान रखिए: विभाग ने अपनी पुस्तिका में साफ़ अपील की है कि फॉर्म अपने मोबाइल से (या ऐसे जानकार के मोबाइल से जिससे आपका संपर्क बना रहे) भरिए। कई लोग किसी और के लॉगिन से फॉर्म भरवा लेते हैं। फिर अंचलाधिकारी कमी बताकर फॉर्म वापस भेजते हैं तो वह उसी दूसरे आदमी के लॉगिन में जाता है, और सुधार करवाना मुश्किल हो जाता है। अपने मोबाइल से करेंगे तो हर चरण की सूचना भी आपके मोबाइल पर आएगी।

जमाबंदी (Register-II) ऑनलाइन कैसे देखें

जमाबंदी पंजी में रैयत का नाम और पता, खाता-खेसरा, रकबा, चौहद्दी, तय लगान और जमा लगान की जानकारी रहती है। विभाग की पुस्तिका के अनुसार दिसंबर 2017 से अक्टूबर 2018 के बीच सभी 534 अंचलों की लगभग 3.58 करोड़ जमाबंदियाँ डिजिटल करके पोर्टल पर डाली गईं। अब लगभग 4 करोड़ 40 लाख जमाबंदियाँ ऑनलाइन देखी जा सकती हैं।

  1. पोर्टल पर “जमाबंदी पंजी देखें” पर क्लिक कीजिए। इसके लिए लॉगिन नहीं चाहिए।
  2. जिला और अंचल चुनकर “Proceed” दबाइए।
  3. हलका (पंचायत) और मौज़ा का नाम चुनिए।
  4. इनमें से कोई एक विकल्प चुनकर भरिए और “Search” दबाइए: भाग संख्या-पृष्ठ संख्या, रैयत का नाम, खाता संख्या, खेसरा संख्या, पुरानी जमाबंदी संख्या या कम्प्यूटरीकृत जमाबंदी संख्या। चाहें तो उस मौज़ा की सारी जमाबंदी देखने का विकल्प भी चुन सकते हैं।
  5. सूची में अपनी जमाबंदी के आगे “view” दबाइए। पूरा विवरण दिख जाएगा।

एक सुझाव: रैयत का नाम अलग-अलग तरह से लिखा मिल सकता है। नाम से न मिले तो खाता या खेसरा संख्या से खोजिए।

जमाबंदी के साथ और क्या दिखता है

  • 2017-18 के बाद ऑनलाइन दाखिल-खारिज से उस जमाबंदी से खारिज हुए वादों का ब्योरा।
  • उस जमाबंदी पर भूमि बंधक (Land Mortgage) का ब्योरा।
  • अंचल स्तर पर उस जमाबंदी में किए गए बदलाव।
  • राजस्व न्यायालयों में उसके खिलाफ दायर मुकदमे।

बंधक और कोर्ट केस वही दिखते हैं जो ऑनलाइन दर्ज हो चुके हैं। यानी कुछ न दिखने का मतलब हमेशा “कुछ नहीं है” नहीं होता। जमीन खरीदने से पहले अंचल कार्यालय से भी पूछ लीजिए।

ऑनलाइन जमाबंदी दो तरह की होती है

  • पुरानी ऑनलाइन जमाबंदी: 2017-18 में ऑनलाइन दाखिल-खारिज शुरू होने से पहले की जमाबंदी, जो खतियान, जमाबंदी रिटर्न या पुराने ऑफलाइन दाखिल-खारिज के आधार पर रजिस्टर में दर्ज थी और बाद में डिजिटल की गई।
  • ऑनलाइन दाखिल-खारिज से बनी जमाबंदी: ऑनलाइन वाद पूरा होने पर पुराने रैयत की जमाबंदी से रकबा अपने-आप घटकर नए रैयत के नाम पर चढ़ता है।

गलती हो या जमाबंदी ऑनलाइन न दिखे तो

नाम, पता, खाता-खेसरा, रकबा, लगान आदि में गलती हो, या आपकी जमाबंदी ऑनलाइन है ही नहीं, तो परिमार्जन प्लस पर कागजात के साथ आवेदन कीजिए। विभाग का FAQ यही रास्ता बताता है। सरकारी काम या बैंक के लिए जमाबंदी की हस्ताक्षरित कॉपी चाहिए तो भू-अभिलेख पोर्टल वाला हिस्सा देखिए।

SMS अलर्ट और मोबाइल/आधार सीडिंग

SMS अलर्ट में आप अपनी (या अपनी रुचि की) जमाबंदी/खेसरा से अपना मोबाइल नंबर जोड़ लेते हैं। फिर उस पर बदलाव की प्रक्रिया शुरू होने के समय और पूरी होने पर SMS आता है। FAQ के अनुसार जमाबंदी में बदलाव का एक ही रास्ता दाखिल-खारिज है (पुरानी जमाबंदी की गलतियाँ परिमार्जन प्लस से भी सुधरती हैं), और दोनों के आवेदन पर सूचना SMS से मिलेगी।

  1. पोर्टल पर “SMS अलर्ट सेवा प्राप्त करें” पर क्लिक कीजिए और मोबाइल से लॉगिन कीजिए।
  2. जिला और अंचल चुनकर “Next” दबाइए। फिर हलका, मौज़ा, भाग संख्या और पृष्ठ संख्या भरकर “Search” कीजिए।
  3. सूची में अपनी जमाबंदी के आगे “Next” दबाइए।
  4. जिस प्लॉट पर अलर्ट चाहिए उसके आगे टिक लगाइए। पूरी जमाबंदी के लिए “Check All” पर टिक कीजिए, फिर “Proceed”।
  5. मोबाइल पर आया OTP भरकर Submit कीजिए। उस जमाबंदी के प्लॉट/खेसरा पर SMS अलर्ट दर्ज हो जाएगा।

कौन-सा मोबाइल जुड़ा है, कैसे देखें: पोर्टल पर “Check Aadhaar/Mobile Seeding Status” खोलिए, कम्प्यूटरीकृत जमाबंदी संख्या भरकर “Check Status” दबाइए। उस जमाबंदी से जुड़े मोबाइल और आधार की स्थिति दिख जाएगी।

जमाबंदी “लॉक” कराना? FAQ के अनुसार किसी जमाबंदी को दाखिल-खारिज के लिए लॉक करने का कोई नियम नहीं है। रास्ता यह है: SMS अलर्ट चुनिए, और अपनी जमाबंदी से ऐसा दाखिल-खारिज चलता दिखे जिससे आप सहमत नहीं, तो उस पर आपत्ति दर्ज कीजिए। FAQ का कहना है कि किसी भी वाद के निपटारे से कम से कम 15 दिन पहले आपको जानकारी मिल सकती है।

दाखिल-खारिज (Mutation) ऑनलाइन कैसे करें

जमीन खरीदने, दान या बंटवारे में पाने, या विरासत में मिलने के बाद सिर्फ़ रजिस्ट्री से सरकारी रिकॉर्ड में मालिक का नाम नहीं बदलता। नाम जमाबंदी में चढ़वाने की इस प्रक्रिया को दाखिल-खारिज कहते हैं। विभाग के FAQ में भी यही लिखा है कि खरीद-बिक्री मात्र से राजस्व अभिलेख में स्वामित्व का अंतरण नहीं होता। ध्यान रखिए कि दाखिल-खारिज से सिर्फ़ राजस्व रिकॉर्ड (जमाबंदी) में नाम चढ़ता है; मालिकाना हक़ के झगड़े का फैसला कोर्ट करता है।

आवेदन से पहले ये पाँच बातें जाँच लीजिए

  1. बेचने वाले की जमाबंदी ऑनलाइन देखिए। जिसकी जमाबंदी से जमीन खारिज होनी है, उसकी जमाबंदी ऑनलाइन होनी चाहिए, और उसमें वही खाता-खेसरा तथा उतना रकबा दर्ज होना चाहिए जितना आपको खारिज कराना है। यह शर्त विभाग ने अनिवार्य कर दी है। न हो तो पहले परिमार्जन प्लस से उसकी जमाबंदी ठीक करवाइए।
  2. जमाबंदी रैयत से ही जमीन खरीदिए। विभाग की अपील है कि जमीन हमेशा जमाबंदी रैयत से खरीदें और खरीद से पहले पोर्टल पर जाँच लें। किसी वंशज या एक हिस्सेदार से खरीदी हो तो सभी हिस्सेदारों का लिखित सहमति पत्र लगेगा, साथ में वंशावली और जमाबंदी रैयत से बेचने वाले का रिश्ता बताने वाला साक्ष्य भी।
  3. संयुक्त जमाबंदी हो तो बाकी हिस्सेदारों का सहमति पत्र ज़रूरी है।
  4. मिलजुमले रकबा: अगर कागज में दो या ज़्यादा खेसरा का इकट्ठा रकबा लिखा है, तो FAQ में साफ़ लिखा है कि उसका दाखिल-खारिज नहीं हो सकता। पुराने कागज हों तो ई-मापी से अंचल अमीन द्वारा मापी करवाकर हर खेसरा का अलग रकबा तय करवाइए, फिर आवेदन कीजिए। अगर बेचने वाले की जमाबंदी में ही मिलजुमले रकबा है, तो वह अपने साक्ष्य से परिमार्जन प्लस पर अलग-अलग रकबा चढ़वाए।
  5. 90 दिन की सीमा: जमीन पर अधिकार मिलने (रजिस्ट्री, दान, बंटवारा आदि) के 90 दिन के भीतर आवेदन कीजिए। देर हो गई तो आवेदन के साथ “विलंब माफी याचिका” लगानी होती है, जिस पर अंचलाधिकारी योग्यता के आधार पर फैसला करते हैं।

कौन-सा कागज लगेगा

विभाग के FAQ के अनुसार जमीन जिस तरीके से मिली, उसी के हिसाब से कागजात लगते हैं:

जमीन कैसे मिली ज़रूरी कागज
खरीद-बिक्री या दान निबंधित (registered) दस्तावेज़ / दर केवला
विनिमय (अदला-बदली) निबंधित दस्तावेज़ / दर केवला
बंटवारा कोर्ट के बंटवारा-आदेश की छाया प्रति, या निबंधित बंटवारा दस्तावेज़ की छाया प्रति, या सभी पक्षों के दस्तखत वाले आपसी बंटवारे की छाया प्रति, या पंचायती बंटवारे की छाया प्रति; साथ में सभी पक्षों की लिखित सहमति
विरासत (उत्तराधिकार) मृत्यु प्रमाण पत्र और वंशावली
वसीयत (Will) प्रोबेट आदेश के साथ वसीयत
कोर्ट का आदेश या डिक्री जमीन के स्वत्व वाद में कोर्ट के आदेश की छाया प्रति (सिविल प्रक्रिया संहिता 1908, या बिहार भूमि विवाद समाधान अधिनियम 2009 के तहत)
सरकारी बंदोबस्ती (भूदान, वासगीत, अधिशेष भूमि, सार्वजनिक भूमि का बंदोबस्त या हस्तांतरण) पर्चा की प्रति
महादलित परिवारों के लिए रैयती जमीन का त्रिपक्षीय क्रय (क्रय नीति, 2010) निबंधित दस्तावेज़ और पर्चा की प्रति
भू-अर्जन (सरकारी अधिग्रहण) अधिघोषणा और अवार्ड की प्रति
पूर्व रैयत को जमीन की वापसी (प्रत्यावर्तन) रद्द करने की अधिसूचना की प्रति

ऑनलाइन आवेदन कैसे भरें

  1. पोर्टल पर “ऑनलाइन दाखिल-खारिज आवेदन करें” खोलिए और अपने मोबाइल से लॉगिन कीजिए।
  2. जिला और अंचल चुनकर “नया दाखिल-खारिज आवेदन” दबाइए।
  3. पाँच हिस्से भरने होंगे: आवेदक का विवरण, खाता-खेसरा का विवरण, क्रेता/वंशज/हिस्सेदार का विवरण, विक्रेता/पूर्व जमाबंदीदार का विवरण, और साक्ष्य अपलोड। हर हिस्से के बाद “Save & Next” दबाइए। साक्ष्य के लिए हर कागज का अलग-अलग PDF अपलोड करने का विकल्प मिलता है।
  4. सब हिस्से भरने के बाद क्रेता के मोबाइल पर आए OTP से सत्यापन कीजिए।
  5. Preview में सब जाँचकर “Final Submit” दबाइए। पावती मिलेगी, जिसमें आवेदन का Token number होगा। इसे संभालकर रखिए।

आवेदन के बाद क्या-क्या होता है

  1. संवीक्षा (scrutiny): अंचलाधिकारी (CO) खुद या राजस्व कर्मचारी से आवेदन जँचवाते हैं। सही मिला तो आवेदन स्वीकार होकर “दाखिल-खारिज वाद संख्या” मिल जाती है। कमी या कागज की गड़बड़ी मिली तो कारण के साथ आवेदन आपके लॉगिन में लौट आता है; सुधारकर दोबारा जमा कीजिए।
  2. जमीन पर जाँच: राजस्व कर्मचारी हर खेसरा का भौतिक सत्यापन रिपोर्ट भरते हैं, फिर राजस्व अधिकारी अपनी राय लिखकर अंचलाधिकारी को भेजते हैं।
  3. आम और खास सूचना: आदेश से पहले अंचलाधिकारी उस खेसरा के दाखिल-खारिज की आम सूचना और खास सूचना निकालते हैं और 14 दिन तक आपत्ति के इंतज़ार में आदेश नहीं देते।
  4. आदेश: 14 दिन में आपत्ति नहीं आई तो अंचलाधिकारी रिपोर्ट के आधार पर (या खुद जाँचकर) आदेश देते हैं। आपत्ति आई तो पहले सभी पक्षों की सुनवाई होती है, फिर आदेश।
  5. शुद्धि-पत्र: मंजूरी का आदेश हुआ तो अंचलाधिकारी दाखिल-खारिज शुद्धि-पत्र निकालते हैं। उसी के साथ उस खेसरा का रकबा पुराने रैयत की जमाबंदी से घटकर नए रैयत के नाम पर अपने-आप चढ़ जाता है और प्रक्रिया पूरी हो जाती है।

कितना समय और कितना शुल्क लगता है

  • समय: पोर्टल के FAQ के अनुसार जिन वादों में आपत्ति नहीं आई, उनमें याचिका मिलने के 35 कार्य-दिवस (सरकारी कामकाज वाले दिन) के भीतर अंचलाधिकारी को आदेश देकर निपटारा करना है। जिनमें आपत्ति आई, उनमें सुनवाई और साक्ष्य का मौका देकर 75 कार्य-दिवस के भीतर। पुरानी वेबसाइटों और पुराने पाठों में दूसरी संख्याएँ मिलती हैं; हमने पोर्टल के FAQ वाली संख्या ली है।
  • शुल्क: पोर्टल के FAQ में 9 अक्टूबर 2026 को भी “पूर्णतः निःशुल्क” लिखा है। 2026 में इसमें बदलाव की खबर के लिए नीचे देखिए।

स्थिति कैसे देखें और आवेदन लौट आए तो

  • Token की स्थिति: पोर्टल पर “Mutation Defect Check Status” में जिला, अंचल और Token number से Search कीजिए।
  • वाद की स्थिति: वाद संख्या मिलने के बाद “दाखिल-खारिज आवेदन स्थिति देखें” में जिला, अंचल, वित्तीय वर्ष और वाद संख्या डालिए, सुरक्षा कोड भरकर Search कीजिए।
  • आवेदन वापस आए तो: अपने उसी लॉगिन में “Application Scrutiny Status” से कमी सुधारिए या कागज दोबारा जमा कीजिए। अंचल कार्यालय अलग से कोई साक्ष्य माँगे तो वह भी उसी लॉगिन से जमा होता है जिससे वाद दायर हुआ था।

आपत्ति और अपील

  • आपत्ति (Objection): कोई आपकी जमीन या साझे की जमीन का दाखिल-खारिज करा रहा है और आप सहमत नहीं, तो लॉगिन करके “दाखिल-खारिज वाद पर आपत्ति दर्ज करें” खोलिए, वाद खोजिए, आपत्ति लिखिए, कागज अपलोड कीजिए और Submit कीजिए। FAQ का उदाहरण: भाई ने बिना बंटवारे के पुश्तैनी जमीन बेच दी हो तो बाकी हिस्सेदार आपत्ति दर्ज कर सकते हैं, और आपत्ति सही निकली तो अंचलाधिकारी स्वामित्व का अंतरण नहीं करेंगे। सुनवाई की तारीख SMS से और नोटिस के ज़रिए बताई जाती है।
  • अपील: अंचलाधिकारी के आदेश से संतुष्ट नहीं हैं तो आदेश के 30 दिन के भीतर भूमि सुधार उप समाहर्ता (DCLR) के यहाँ अपील कीजिए। 30 दिन बीत गए तो अपील के साथ विलंब माफी याचिका लगानी होगी। उनके आदेश से भी असंतुष्ट हों तो समाहर्ता/अपर समाहर्ता के यहाँ पुनरीक्षण वाद, और उसके बाद बिहार भूमि न्यायाधिकरण या सिविल कोर्ट। निपटारे के बाद वाद अभिलेख की सत्यापित कॉपी भू-अभिलेख पोर्टल से मिलती है।

दाखिल-खारिज रुकने या खारिज होने के आम कारण

बिहार भूमि दाखिल-खारिज अधिनियम, 2011 की धारा 6 (राजपत्र का पाठ) में ये बातें लिखी हैं:

  • बिक्री, दान या विनिमय का दस्तावेज़ निबंधित (registered) न हो।
  • वसीयत के आधार पर दावा है, पर सक्षम कोर्ट से प्रोबेट नहीं हुआ।
  • बंटवारा कोर्ट या निबंधित दस्तावेज़ से नहीं हुआ और सभी हिस्सेदारों की सहमति नहीं है।
  • उस जमीन पर स्वत्व (मालिकाना हक़) का मुकदमा कोर्ट में लंबित हो।
  • जमीन पर हक़ पाने वाले का उस पर भौतिक दखल न हो।

इनके अलावा बेचने वाले की जमाबंदी में रकबा कम होना या न होना, मिलजुमले रकबा, और आवेदन में कागज की कमी भी आम अड़चनें हैं (ऊपर देखिए)।

रजिस्ट्री के साथ दाखिल-खारिज (Suo-Moto)

पोर्टल के होम पेज पर “निबन्धन के साथ दाखिल ख़ारिज का प्रपत्र” नाम से एक PDF प्रपत्र है। इसमें केवाला या दानपत्र के निबंधन के बाद अंचलाधिकारी से ऑनलाइन दाखिल-खारिज (Suo-Moto) करने का अनुरोध किया जाता है, और क्रेता-विक्रेता तथा जमीन का ब्योरा भरना होता है। आपके रजिस्ट्री कार्यालय और अंचल में यह व्यवस्था कैसे चल रही है, वहीं से पूछ लीजिए। रजिस्ट्री के बाद भी पोर्टल पर स्थिति ज़रूर देखिए।

2026 की खबरें, जो अभी पक्की नहीं हैं।

₹200 शुल्क: पटना प्रेस की 21 जुलाई 2026 की रिपोर्ट के अनुसार विधानसभा ने सात विधेयक पास किए, जिनमें बिहार भूमि दाखिल-खारिज (संशोधन) विधेयक, 2026 भी है। रिपोर्ट में लिखा है कि इसमें पूरे राज्य में दाखिल-खारिज पर ₹200 शुल्क की व्यवस्था है, और विधेयक राज्यपाल की मंजूरी के बाद लागू होंगे। मंजूरी या अधिसूचना की कोई खबर हमें नहीं मिली, और पोर्टल का FAQ 9 अक्टूबर 2026 को भी “निःशुल्क” ही कहता है। इसलिए आवेदन के समय पोर्टल पर जो दिखे, वही मानिए। शुल्क लगे भी तो पोर्टल के भुगतान पेज से ही भरिए और रसीद संभालकर रखिए।

वारिसों के लिए सरकारी पहल: पटना प्रेस की ही 20 जुलाई 2026 की खबर के अनुसार राजस्व सचिव के मास्टर सर्कुलर में निर्देश है कि मृत रैयतों की जमीन पर वारिसों के नाम दाखिल-खारिज की पहल अब अंचल की ओर से होगी। कर्मचारी पंचायत के जन्म-मृत्यु रजिस्टर, चौकीदार और स्थानीय लोगों की मदद से मृत रैयतों की सूची बनाकर वारिसों से संपर्क करेंगे और कागजात व सहमति पत्र लेंगे। खबर में वारिसों को शुरुआत के लिए 7 दिन में कागजात देने की बात है। हमने मूल परिपत्र नहीं देखा है। आपके परिवार की जमीन अब भी किसी गुज़र चुके बुज़ुर्ग के नाम पर है तो अंचल कार्यालय से संपर्क कर लीजिए।

भू-लगान ऑनलाइन कैसे भरें

  1. पोर्टल पर “भू-लगान” पर क्लिक कीजिए (सीधा पता: bhulagan.bihar.gov.in)।
  2. जिला, अंचल, हलका और मौज़ा चुनिए। फिर जमाबंदी का विवरण (भाग-पृष्ठ, रैयत का नाम, खाता, खेसरा, जमाबंदी संख्या या कम्प्यूटरीकृत जमाबंदी संख्या) भरकर अपनी जमाबंदी का पन्ना खोजिए और उसके आगे “देखें” दबाइए।
  3. जमाबंदी, लगान और बकाया राशि स्क्रीन पर आ जाएगी।
  4. अपना नाम, मोबाइल नंबर और पता लिखकर “ऑनलाइन भुगतान करें” दबाइए।
  5. भुगतान के दो तरीके हैं (पुस्तिका के अनुसार): E-payment (PNB, IDBI, SBI, UBI, Canara Bank और Bank of Baroda की नेट बैंकिंग; UPI-SBI; SBI का डेबिट या क्रेडिट कार्ड) और बैंक काउंटर पर चालान से (सिर्फ़ PNB और SBI)।
  6. E-payment सफल हुआ तो लगान रसीद की कॉपी मिल जाती है। चालान चुना तो बैंक चालान मिलेगा; बैंक में जमा करने के बाद लगान रसीद आपकी जमाबंदी वाले पन्ने पर दिखेगी। भू-लगान भुगतान की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है, यानी रसीद कटवाने के लिए अंचल के चक्कर नहीं लगाने पड़ते।

पैसा कट गया पर रसीद नहीं आई तो

  • भू-लगान पोर्टल पर “लंबित भुगतान देखें” (Failed Transaction Status) खोलिए, Transaction ID डालकर “Verify” दबाइए। भुगतान सफल निकला तो रसीद निकल जाती है।
  • Transaction ID न मिले तो पोर्टल पर अपनी जमाबंदी खोजिए और “पिछला भुगतान देखें” पर जाइए। वहाँ पहले के सभी Depositor ID और Transaction ID मिल जाएँगी।
  • पोर्टल की साफ़ सलाह है: भुगतान फेल या पेंडिंग दिखे तो दोबारा भुगतान मत कीजिए, पहले स्टेटस जाँचिए।
  • भू-लगान पोर्टल के पन्ने के नीचे यह ईमेल आईडी दी गई है: lagaancomplaint@gmail.com।

एक बात और: जमाबंदी में लगान अद्यतन (updated) न हो तो LPC के लिए आवेदन से पहले लगान भरना पड़ता है।

परिमार्जन प्लस: जमाबंदी की गलती सुधारने का रास्ता

परिमार्जन प्लस डिजिटल जमाबंदी पंजी की अशुद्धियाँ सुधारने और छूटी हुई जमाबंदी को ऑनलाइन कराने का पोर्टल है। प्रक्रिया ऑनलाइन है, पर कुछ मौज़ा-संबंधी गलतियों के लिए अंचलाधिकारी के यहाँ ऑफलाइन आवेदन देना पड़ता है (नीचे देखिए)।

1. पुरानी ऑनलाइन जमाबंदी में गलती सुधारना

ऑनलाइन दाखिल-खारिज शुरू होने से पहले की जमाबंदी में डिजिटल करते समय जो गलतियाँ हुईं, जैसे रैयत या पिता का नाम, जाति, पता; खाता, खेसरा, चौहद्दी, रकबा (गलत या दर्ज ही नहीं); लगान की राशि या साल, उनके लिए:

  1. पोर्टल पर “परिमार्जन प्लस” खोलिए और मोबाइल से लॉगिन कीजिए।
  2. आवेदन का प्रकार “डिजिटल जमाबंदी में सुधार करें” में “Rectification in Old Jamabandi” चुनिए और अपनी जमाबंदी खोजिए।
  3. जमाबंदी का पूरा विवरण खुलेगा। जिस हिस्से में गलती है, उस सेक्शन में “YES” कीजिए। जिस चीज़ को बदलना है उसके आगे “परिवर्तन अनुरोध” में YES कीजिए और सही विवरण भरिए।
  4. बदलाव के सबूत (कागजात) अपलोड कीजिए और Preview देखिए।
  5. सब सही हो तो Finalize कीजिए। Finalize के बाद बदलाव नहीं हो सकता, इसलिए बदलना हो तो पहले Edit कीजिए। फिर Final Submit कीजिए। पावती संख्या मिलेगी, इसी से स्थिति देखिए।

2. छूटी हुई जमाबंदी को ऑनलाइन कराना

जमाबंदी सालों से चल रही है और रसीद भी कटती है, पर ऑनलाइन दिखती ही नहीं (कम्प्यूटरीकरण में छूट गई), तो:

  1. “परिमार्जन प्लस” में लॉगिन करके आवेदन का प्रकार “कम्प्यूटराईजेशन हेतु छूटे हुए जमाबंदी का डिजिटाईजेशन” चुनिए।
  2. जिला और अंचल चुनकर “Process” दबाइए। फिर हलका और मौज़ा चुनकर “Prepare Application” दबाइए।
  3. पहले भाग में जमाबंदी संख्या, होल्डिंग संख्या, वॉल्यूम संख्या और पेज संख्या में से जो पता हो वह भरिए। फिर रैयत, प्लॉट और लगान का ब्योरा भरकर “Next” दबाइए।
  4. आख़िरी भाग में अलग-अलग साक्ष्य के PDF अपलोड कीजिए, Preview देखिए और Final Submit कीजिए। मिली रसीद संभालकर रखिए। गलती हो तो Edit से सुधार सकते हैं।

आवेदन के बाद क्या होता है

  • आवेदन अंचलाधिकारी को ऑनलाइन मिलता है, जो उसे जाँच के लिए राजस्व कर्मचारी को भेजते हैं। कर्मचारी की जाँच में सही निकला तो मंजूरी के लिए अंचलाधिकारी के पास जाता है; सही न निकला तो कारण के साथ आपको सुधार के लिए लौटा दिया जाता है।
  • अंचलाधिकारी कर्मचारी की रिपोर्ट के आधार पर या खुद जाँचकर आवेदन मंजूर या अस्वीकार कर सकते हैं। मंजूरी के बाद सुधार जमाबंदी पंजी में दर्ज हो जाता है।
  • 30 दिन का नियम: सुधार के लिए लौटाया गया आवेदन 30 दिन के भीतर सुधारकर वापस न भेजा तो वह अपने-आप रद्द हो जाता है। चाहें तो दोबारा आवेदन कर सकते हैं।
  • लौटा हुआ आवेदन आपके परिमार्जन प्लस लॉगिन की होम स्क्रीन पर दिखेगा। स्थिति देखने के लिए “परिमार्जन प्लस आवेदन स्थिति देखें” में जिला, अंचल और आवेदन संख्या डालकर Search कीजिए।

मौज़ा की गलती: किसी और मौज़ा की जमाबंदी दूसरे मौज़ा में ऑनलाइन हो गई हो, या दो-तीन मौज़ा की जमाबंदी एक ही मौज़ा में चली गई हो, तो FAQ के अनुसार अंचलाधिकारी के यहाँ ऑफलाइन आवेदन देना होता है। फिर रिकॉर्ड खोलकर आगे की कार्रवाई होती है।

ऑनलाइन दाखिल-खारिज के बाद बनी जमाबंदी में गलती: खरीदार, विक्रेता या रैयत के नाम की गलती या छूट, तथा लगान राशि और चौहद्दी की गलती भी FAQ के अनुसार परिमार्जन प्लस पर आवेदन देकर सुधरवाई जाती है। खाता-खेसरा-रकबा की गलती के लिए FAQ में अलग रास्ता साफ़ नहीं लिखा है; अपने अंचल से पूछ लीजिए।

भूमि दखल-कब्ज़ा प्रमाण पत्र (LPC) कैसे बनवाएँ

LPC सरकारी लाभ या लोन लेने के लिए ज़रूरी होता है। पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन है।

  1. पोर्टल पर “ऑनलाइन एलपीसी आवेदन करें” खोलिए, मोबाइल से लॉगिन कीजिए, फिर जिला-अंचल चुनकर “नया LPC आवेदन करें” दबाइए।
  2. हलका और मौज़ा चुनिए, और इनमें से कोई एक भरकर Search कीजिए: भाग संख्या-पृष्ठ संख्या, खाता, खेसरा, नाम या जमाबंदी संख्या।
  3. जमाबंदी में लगान अद्यतन हो तो “apply for LPC” दबाइए। अद्यतन न हो तो पहले ऑनलाइन लगान भरिए।
  4. जिस जमाबंदी का LPC चाहिए, उसके आगे “चयन करें” दबाइए।
  5. अपना नाम, पता और LPC का उद्देश्य भरिए। स्व-घोषणा पत्र (ज़रूरी) और कोई और साक्ष्य हो तो उसका PDF अपलोड कीजिए, फिर “Save & Next”।
  6. Preview देखकर “Final Submit” दबाइए। पावती मिलेगी।
  7. स्थिति के लिए “LPC आवेदन स्थिति देखें” में आवेदन संख्या और वर्ष चुनकर Search कीजिए। आवेदन स्वीकार हो जाने पर आप अपना LPC प्राप्त कर सकते हैं।
  • LPC डिजिटाइज्ड जमाबंदी के आधार पर जारी होता है। अंचलाधिकारी ऑनलाइन जमाबंदी की जाँच और आपके स्व-घोषणा के आधार पर इसे जारी करते हैं।
  • पूरे राज्य के लिए LPC का एक ही प्रारूप है।
  • जमाबंदी में एक से ज़्यादा रैयत हों तो सबके नाम के साथ एक ही LPC बनता है। संयुक्त जमाबंदी में अपने हिस्से का अलग LPC चाहिए तो पहले बंटवारा दाखिल-खारिज से जमाबंदी का बंटवारा अपने नाम पर कराना होगा।
  • जारी हुए सभी LPC जाँच-सत्यापन के लिए जमाबंदी पंजी के पन्ने पर ऑनलाइन उपलब्ध रहते हैं।

भू-नक्शा और राजस्व मानचित्र: ऑनलाइन देखिए, डाक से मँगवाइए

नक्शा ऑनलाइन देखना

  1. bhunaksha.bihar.gov.in खोलिए और “View Map” पर क्लिक कीजिए।
  2. जिला, अनुमंडल, अंचल, राजस्व ग्राम, सर्वेक्षण का प्रकार, नक्शे की प्रति संख्या और मानचित्र की शीट संख्या चुनिए। नक्शा स्क्रीन पर आ जाएगा।
  3. किसी खेसरा का विवरण देखना हो तो नक्शे पर उस खेसरा पर क्लिक कीजिए।

छपा हुआ प्रमाणित नक्शा घर पर मँगवाना

विभाग राजस्व मानचित्र की A0 साइज की छपी और अभिप्रमाणित (certified) कॉपी भारतीय डाक विभाग की मदद से घर तक पहुँचाता है। पुस्तिका में लिखा है कि ऑर्डर के बाद 72 घंटे के भीतर नक्शा आपके दिए पते पर उपलब्ध करा दिया जाएगा।

  1. पोर्टल पर “Door Step Delivery of Revenue Maps” खोलिए।
  2. Area Type, Map Type, District, Survey Thana/Municipal और मौज़ा/वार्ड चुनकर “Search Map” दबाइए।
  3. सूची में “Click & View” से नक्शा देखिए। जितनी प्रति चाहिए उसे टिक करके “Add to Cart” दबाइए। एक cart में अधिकतम 5 नक्शे जुड़ सकते हैं।
  4. “Proceed” दबाइए, डिलीवरी का पता भरकर “Checkout” कीजिए, फिर “Pay Now” से भुगतान कीजिए। स्क्रीन पर प्राप्ति रसीद आएगी।
  5. ऑर्डर की स्थिति के लिए उसी सेवा में “Track Your Order” खोलिए और रसीद पर लिखा consignment number डालिए।

नक्शे का शुल्क पुस्तिका में नहीं दिया है; भुगतान से पहले पोर्टल पर दिखने वाली राशि देख लीजिए।

ई-मापी: जमीन की मापी ऑनलाइन कैसे करवाएँ

बिहार काश्तकारी (संशोधन) अधिनियम, 2017 की धारा 118 के तहत रैयती (निजी) जमीन की मापी होती है। आवेदन से लेकर रिपोर्ट तक प्रक्रिया ऑनलाइन है। पोर्टल: emapi.bihar.gov.in (अमीन बुक करने का e-मापी पोर्टल)।

जमीन कहाँ है सामान्य मापी (प्रति खेसरा) तत्काल मापी (प्रति खेसरा)
ग्रामीण क्षेत्र ₹500 ₹1000
नगर निगम, नगर परिषद या नगर पंचायत क्षेत्र ₹1000 ₹2000

शुल्क ऑनलाइन जमा होता है (ई-मापी FAQ के अनुसार)। जल्दी मापी चाहिए तो “तत्काल मापी” का विकल्प है।

आवेदन कैसे भरें

  1. e-मापी पोर्टल (या बिहारभूमि पर “E-Mapi”) खोलिए, “Apply for mapi” पर जाइए और मोबाइल से लॉगिन कीजिए।
  2. जिला और अंचल चुनकर “Proceed” दबाइए। फिर अपनी जमाबंदी का हलका, मौज़ा, भाग संख्या और पृष्ठ संख्या भरकर “Get Reg-2” दबाइए।
  3. जमाबंदी का विवरण आएगा। जिस जमीन की मापी करानी है उसका खाता, खेसरा और रकबा भरकर “Proceed” दबाइए, फिर अपना पूरा विवरण भरकर “Save and Next”।
  4. मापी वाली जमीन के चौहद्दीदार (पड़ोसियों) का विवरण भरिए। मापी के वक्त किसी और की मौजूदगी चाहें तो उसका विवरण भरने का विकल्प भी मिलेगा।
  5. मापी से पहले कुछ प्रश्न पूछे जाएँगे, उन्हें भरिए। साक्ष्य का PDF अपलोड कीजिए और अपने लॉगिन में मिले Self Declaration की कॉपी भी अपलोड कीजिए; यह ज़रूरी है।
  6. Declaration स्वीकार करके “Save and Next” दबाइए। आवेदन संख्या मिलेगी और आवेदन अंचलाधिकारी के पास पहुँच जाएगा। स्थिति “Search Application Status” में देखिए।

शुल्क, तारीख और रिपोर्ट

  • अंचलाधिकारी आवेदन जाँचकर मापी उपयुक्त पाएँ तो आपको शुल्क जमा करने की सूचना देते हैं। वह लॉगिन में “Application Status” के तहत “Pending Payment” (पुस्तिका में “Pending for mapi”) में दिखती है। वहाँ “Proceed for Payment” से भुगतान कीजिए।
  • 60 दिन का नियम: शुल्क 60 दिन के भीतर जमा नहीं किया तो आवेदन अपने-आप अस्वीकृत हो जाता है। दोबारा आवेदन कर सकते हैं।
  • शुल्क के बाद मापी की 3 संभावित तारीखें भरने का विकल्प मिलता है। इनमें से जिस दिन अमीन उपलब्ध हों, उस दिन अंचलाधिकारी मापी तय करते हैं; नहीं तो अमीन की उपलब्धता के हिसाब से तारीख तय होती है। लॉगिन के “अमीन उपलब्धता” मेनू में अमीन की उपलब्धता देखी जा सकती है। तारीख और अमीन की जानकारी SMS और पोर्टल से मिलती है।
  • मापी के बाद अमीन ऑनलाइन रिपोर्ट अंचलाधिकारी को देते हैं। मंजूरी के बाद रिपोर्ट आपको पोर्टल पर दिखने लगती है (“Report” मेनू में “view Mapi”)। प्रमाणित कॉपी भू-अभिलेख पोर्टल से मिलती है।
  • फॉर्म अधूरा रह गया तो “Application Status” के “Incomplete Forms” से पूरा कीजिए। पैसा कट गया पर भुगतान लंबित दिखे तो “भुगतान सत्यापन” से पुराने ट्रांजैक्शन की स्थिति देखिए।
  • अमीन की मापी से संतुष्ट नहीं: भूमि सुधार उप समाहर्ता के न्यायालय में मापी अपील कीजिए। e-मापी में लॉगिन करके “अपील” मेनू में “apply appeal” खोलिए, मापी आवेदन का Temporary Number डालकर “Search Now” कीजिए, खेसरा चुनिए, कारण और साक्ष्य के साथ “Submit Appeal” दबाइए। अपील का शुल्क भी यही प्रति खेसरा ₹500 (ग्रामीण) या ₹1000 (शहरी) है।

भू-अभिलेख पोर्टल: खतियान और दूसरे रिकॉर्ड की हस्ताक्षरित कॉपी

बिहार अभिलेख मैनुअल, 1960 के नियम 297(क) के तहत राजस्व अभिलेखों की हस्ताक्षरित प्रति नागरिकों को देने का प्रावधान है, और यह व्यवस्था ऑनलाइन है। पोर्टल: bhuabhilekh.bihar.gov.in।

  1. पोर्टल खोलिए और लॉगिन कीजिए; अभिलेख खोजने का विकल्प दिखेगा।
  2. अभिलेख का प्रकार चुनिए और जो विवरण लागू हो (जिला, अंचल, मौज़ा, वाद संख्या, साल, खाता, खेसरा, पार्टी का नाम आदि) भरकर “Search” दबाइए।
  3. सूची में हर अभिलेख के आगे “View” से उसे देखिए, और डिजिटल हस्ताक्षरित प्रति के लिए “Apply for Download Copy” दबाइए।
  4. नए पन्ने पर जितने पृष्ठों की प्रति चाहिए वह भरिए। भुगतान की राशि दिखेगी। “Send Application” दबाइए, सब जानकारी जाँचकर “Make Payment” से भुगतान कीजिए।
  5. भुगतान के बाद मिली प्राप्ति रसीद संभाल लीजिए। स्थिति देखने के लिए प्रोफ़ाइल आइकन के नीचे “Track Application” खोलिए।

शुल्क की रकम पुस्तिका में नहीं दी है। पन्ने चुनने के बाद पोर्टल पर “भुगतेय राशि” दिखती है।

इस पोर्टल पर कौन-कौन से अभिलेख मिलते हैं

पुस्तिका की सूची के अनुसार कुल 28 प्रकार के अभिलेख:

  1. कैडेस्ट्रल सर्वे खतियान
  2. रिविजनल सर्वे खतियान
  3. चकबन्दी खतियान
  4. राजस्व ग्राम मानचित्र
  5. जमाबंदी पंजी (डिजिटाईज्ड)
  6. नामांतरण पंजी
  7. नामांतरण अभिलेख
  8. नामांतरण शुद्धि पत्र की मौजावार रक्षी पंजी
  9. भूमि बंदोबस्ती पंजी
  10. गैरमजरुआ आम/खास/कैसरे हिन्द भूमि पंजी
  11. भू-हदबंदी भूमि बंदोबस्ती पंजी
  12. भू-हदबंदी अभिलेख (finally adjudicated)
  13. भूमि क्रय पंजी
  14. वासगीत अभिलेख पंजी
  15. वासगीत पर्चा अभिलेख
  16. राज्य सरकार के पत्रों/परिपत्रों/संकल्प/अधिसूचना की रक्षी सचिका
  17. B.T. Act की धारा 48D की पंजी एवं अभिलेख
  18. गृह स्थल बंदोबस्ती पंजी एवं अभिलेख
  19. भूमि मापी पंजी एवं अभिलेख
  20. भू-सम्पदा पंजी
  21. सैरात पंजी
  22. भूमि अतिक्रमण वाद पंजी एवं अभिलेख
  23. भू-दान, भूमि लगान निर्धारण एवं बन्दोबस्ती पंजी तथा अभिलेख
  24. महादलित भूमि क्रय एवं बन्दोबस्त पंजी एवं अभिलेख
  25. सैरात बन्दोबस्ती पंजी एवं अभिलेख
  26. B.T. Act की धारा 52A के वाद की पंजी एवं अभिलेख
  27. गैरमजरुआ आम/खास (मालिक), कैसरे हिन्द, धार्मिक न्यास, वक्फ बोर्ड, कब्रिस्तान, श्मशान आदि की भूमि से संबंधित पंजी
  28. सरकारी भूमि हस्तान्तरण पंजी

भू-संपरिवर्तन: खेतिहर जमीन को गैर-खेतिहर बनवाना

खेती की जमीन पर घर, दुकान या कोई और गैर-खेतिहर काम करना हो तो बिहार कृषि भूमि (गैर-कृषि प्रयोजनों के लिए संपरिवर्तन) अधिनियम, 2010 और नियमावली, 2011 के तहत संपरिवर्तन कराना होता है। प्रक्रिया ऑनलाइन है और सक्षम प्राधिकार अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) हैं।

  • शुल्क: FAQ के अनुसार खेतिहर जमीन के बाजार मूल्य का 10% संपरिवर्तन शुल्क देना होता है, जो भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 के प्रावधानों के तहत ऑनलाइन जमा होता है। बिना अनुमति संपरिवर्तन करने पर शुल्क के ऊपर उसका 50% जुर्माना (शास्ति) लगता है।
  • कागज: आवेदन के साथ साक्ष्य के रूप में अद्यतन लगान रसीद और नजरी नक्शा अपलोड करने होते हैं।
  • आवेदन: पोर्टल पर “Change in Land use” खोलकर मोबाइल से लॉगिन कीजिए और “Start New Application” दबाइए। उस खेसरा की कम्प्यूटरीकृत जमाबंदी संख्या डालकर “Get Details” कीजिए, खेसरा चुनकर रकबा, चौहद्दी और संपरिवर्तन का कारण भरिए, आवेदक की रिपोर्ट भरकर Save कीजिए। आख़िर में Declaration चुनकर OTP से Submit कीजिए। आवेदन SDO के पास दायर होता है।
  • आगे क्या होता है: SDO जमीन की भौतिक जाँच के लिए अंचलाधिकारी को और शुल्क की जानकारी के लिए जिला उपनिबंधक को आवेदन भेजते हैं। दोनों की रिपोर्ट आने पर आपको लॉगिन में शुल्क भरने की सूचना मिलती है। भुगतान के बाद SDO आवेदन स्वीकार करके भू-संपरिवर्तन प्रमाण पत्र जारी करते हैं, जो आपके लॉगिन में प्रिंट करने लायक मिलता है।
  • इन कामों के लिए अनुमति ज़रूरी नहीं (धारा 8): सरकारी जमीन; स्थानीय निकाय की जमीन जो समुदाय के काम में हो और व्यावसायिक न हो; धार्मिक, सामाजिक या दान के काम की (व्यावसायिक न हो) जमीन; एक एकड़ तक की पारंपरिक पेशे वाली सूक्ष्म गृह-उद्योग की जमीन; 500 वर्ग फीट तक की छोटी दुकान; रैयत और उसके परिवार के घरेलू या खेती के काम (या शिक्षा/दान के काम) के लिए ईंट-खपड़ा बनाना, तालाब या कुआँ खोदना और भवन उठाना; और सौर ऊर्जा के लिए इस्तेमाल होने वाली जमीन।
  • अपील: SDO के आदेश से असंतुष्ट हों तो 60 दिन के भीतर समाहर्ता के यहाँ अपील कर सकते हैं, और समाहर्ता के आदेश के 30 दिन के भीतर प्रमंडलीय आयुक्त के यहाँ पुनरीक्षण।

सूचना: 9 अक्टूबर 2026 को हमारे ब्राउज़र में landconversion.bihar.gov.in एरर दे रही थी। साइट न खुले तो बिहारभूमि होम पेज के “भूमि उपयोग प्रकार में परिवर्तन” लिंक से कुछ देर बाद फिर कोशिश कीजिए।

राजस्व न्यायालय (RCMS): केस दायर करना और स्थिति देखना

राजस्व न्यायालय में वाद दायर करना, सुनवाई की तारीख, cause-list, वाद की स्थिति और अंतरिम या अंतिम आदेश की कॉपी: ये सब ऑनलाइन पोर्टल से मिलते हैं।

केस दायर करना

  1. पोर्टल पर “Revenue Court Management System” खोलिए, “File Case Online” दबाइए और मोबाइल से लॉगिन कीजिए। फिर “राजस्व न्यायालय में मुकदमा दर्ज करें” चुनिए।
  2. न्यायालय चुनिए: अंचलाधिकारी, भूमि सुधार उप समाहर्ता, अपर समाहर्ता, समाहर्ता या प्रमंडलीय आयुक्त।
  3. “ऑनलाइन केस सेक्शन” में उस अधिनियम का नाम चुनिए जिसके तहत वाद दायर करना है। जिला और सर्किल दर्ज करके “आगे बढ़ें” दबाइए।
  4. जमीन का सारा ब्योरा भरकर “Add Details” दबाइए। फिर “Proceed” से फॉर्म भरिए और ज़रूरी कागजात अपलोड कीजिए।
  5. “Save” दबाने पर एक अस्थायी नंबर मिलता है। अंतिम करने (Finalize) से पहले बदलाव करना हो तो “ड्राफ्ट एप्लिकेशन” में जाकर कर सकते हैं।
  6. Finalize के बाद केस “Defect Check” में जाता है। सही मिला तो केस नंबर मिलता है; कमी हो तो आपको सूचना मिलती है। कोर्ट अतिरिक्त कागज माँगे तो “Add Case Records” से जमा कीजिए।

केस की स्थिति और cause-list देखना

इसके लिए लॉगिन नहीं चाहिए। पोर्टल पर “Revenue Court Management System” में “case Status” खोलिए और न्यायालय का प्रकार, अधिनियम का नाम, जिला, न्यायालय का नाम, वाद का वित्तीय वर्ष और वाद संख्या भरकर Search कीजिए। किसी तारीख की सुनवाई-सूची के लिए “Cause List” खोलिए, न्यायालय और तारीख चुनकर “See Causelist” दबाइए।

विशेष सर्वेक्षण से जुड़ी सेवाएँ

बिहार विशेष सर्वेक्षण की सेवाएँ भू-अभिलेख एवं परिमाप निदेशालय के पोर्टल पर हैं (dlrs.bihar.gov.in/services.html)। वहाँ अपना जिला, अनुमंडल, अंचल और मौज़ा चुनकर स्क्रीन के निर्देश के अनुसार आगे बढ़िए। सेवा-सूची में (9 अक्टूबर 2026 को) ये प्रमुख विकल्प हैं:

  • आपके ग्राम या शहर में विशेष सर्वेक्षण की स्थिति देखना
  • रैयत द्वारा स्वामित्व/धारित भूमि की स्वघोषणा का प्रपत्र
  • खानापुरी पर्चा और खेसरावार मानचित्र देखना; उसके आधार पर दावा/आक्षेप जमा करना और निपटारे का आदेश देखना
  • प्रारूप खानापुरी अधिकार अभिलेख (प्रपत्र-12) और प्रारूप मानचित्र देखना; दावा/आक्षेप जमा करना
  • लगान बंदोबस्ती दर तालिका 18(क) देखना
  • अंतिम रूप से प्रकाशित अधिकार अभिलेख और मानचित्र देखना; दावा/आक्षेप जमा करना
  • नागरिक अधिकार अभिलेख कार्ड प्रिंट करना

सर्वेक्षण का काम जिलेवार चलता है। हमने आख़िरी तारीख इसलिए नहीं दी कि खबरों में अलग-अलग तारीखें आ रही हैं और आधिकारिक पुष्टि हमें नहीं मिली। तारीख के लिए अपने ज़िले/अंचल की घोषणा और पोर्टल पर “स्थिति देखना” वाला विकल्प ही देखिए।

परेशानी आए तो कहाँ शिकायत करें

  • तकनीकी दिक्कत (लॉगिन न होना, फॉर्म सबमिट न होना आदि): Raise a Ticket (Complaint Management System)। यहाँ e-Mutation, e-LPC, RCMS, Parimarjan, e-Jamabandi और e-ChaluKhatiyan जैसे सिस्टम की समस्या दर्ज होती है। 17 अंकों का Ticket ID मिलता है, जो आगे हर बार काम आता है। आवेदन के अंदर मेनू से भी Ticket बनाया जा सकता है।
  • जन शिकायत: विभाग का जन शिकायत पोर्टल (Public Grievance Portal)। यहाँ पंजीकृत मोबाइल नंबर और OTP से लॉगिन होता है, और शिकायत की स्थिति भी देखी जा सकती है।
  • टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-345-6215: विभाग के मैनुअल में यही नंबर लिखा है। 1 जून 2025 की एक खबर में इसे राज्य की भूमि हेल्पलाइन बताया गया था और सोमवार से शनिवार, सुबह 9:30 से शाम 6 बजे तक का समय घोषित हुआ था। समय और उपलब्धता बदल सकती है। पोर्टल का “संपर्क करें” पन्ना सिर्फ़ विभाग का पता दिखाता है: पुराना सचिवालय, बेली रोड, पटना-800015।
  • भू-लगान: भू-लगान पोर्टल के पन्ने पर lagaancomplaint@gmail.com ईमेल आईडी दी गई है।
  • अंचल कार्यालय और ऊपर के अधिकारी: देरी या गलत आदेश पर अंचलाधिकारी, फिर भूमि सुधार उप समाहर्ता के यहाँ अपील या शिकायत। रास्ता ऊपर दाखिल-खारिज वाले हिस्से में है।

ठगों से बचिए: ये सारे सरकारी पोर्टल bihar.gov.in पर खत्म होने वाले पते पर ही हैं। फॉर्म भरवाने, दाखिल-खारिज “जल्दी कराने” या रसीद निकालने के नाम पर किसी को पइसा मत दीजिए। जहाँ शुल्क लगता है (जैसे मापी), वह पोर्टल के भुगतान पेज से ऑनलाइन जमा होता है; रसीद ज़रूर लीजिए। कोई अलग पते की लिंक भेजकर मोबाइल, OTP या बैंक की जानकारी माँगे तो मत दीजिए।

आम गलतियाँ जिनसे बचें

  • बेचने वाले की जमाबंदी ऑनलाइन देखे बिना जमीन खरीद लेना।
  • रजिस्ट्री के बाद 90 दिन गुज़ार देना और विलंब माफी याचिका न लगाना।
  • किसी और के लॉगिन से फॉर्म भरवाना, फिर सुधार के लिए लौटे आवेदन तक पहुँच ही न पाना।
  • संयुक्त जमाबंदी या एक हिस्सेदार से खरीद में बाकी हिस्सेदारों का सहमति पत्र न लगाना।
  • मिलजुमले रकबा वाले कागज पर सीधे दाखिल-खारिज का आवेदन देना।
  • Token नंबर और पावती संभालकर न रखना।
  • SMS अलर्ट चालू न करना, जिससे अपनी जमाबंदी पर चल रहे दाखिल-खारिज की खबर ही न लगे।
  • लगान का भुगतान फेल या पेंडिंग दिखने पर स्टेटस जाँचे बिना दोबारा पैसा भर देना।
  • परिमार्जन प्लस में Finalize दबाने के बाद बदलाव सोचना; Finalize से पहले ही सब जाँच लीजिए।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Bihar Bhumi पर जमाबंदी देखने के लिए लॉगिन चाहिए?

नहीं। जमाबंदी देखना “ऑनलाइन सूचना” में आता है, जो बिना लॉगिन खुलती है। दाखिल-खारिज, परिमार्जन प्लस, ई-मापी जैसी सेवाओं के लिए मोबाइल से लॉगिन चाहिए।

दाखिल-खारिज में कितना समय लगता है?

पोर्टल के FAQ के अनुसार आपत्ति न आए तो याचिका मिलने के 35 कार्य-दिवस के भीतर, और आपत्ति आए तो 75 कार्य-दिवस के भीतर अंचलाधिकारी को आदेश देना है।

दाखिल-खारिज की फीस कितनी है?

पोर्टल के FAQ में 9 अक्टूबर 2026 को भी “पूर्णतः निःशुल्क” लिखा है। जुलाई 2026 में ₹200 शुल्क वाला संशोधन विधेयक विधानसभा से पास हुआ बताया गया है, पर उसके लागू होने की अधिसूचना हमें नहीं मिली। आवेदन के समय पोर्टल पर जो दिखे, वही मानिए।

रजिस्ट्री के कितने दिन के अंदर दाखिल-खारिज कराना चाहिए?

जमीन पर अधिकार मिलने के 90 दिन के भीतर। देर हुई तो विलंब माफी याचिका के साथ आवेदन करना होता है।

जमाबंदी में नाम या रकबा गलत है, कैसे सुधरवाएँ?

परिमार्जन प्लस पर “डिजिटल जमाबंदी में सुधार करें” से सबूत के साथ आवेदन दीजिए। अंचलाधिकारी जाँच के बाद सुधार करते हैं।

मेरी जमाबंदी ऑनलाइन नहीं दिख रही, क्या करें?

परिमार्जन प्लस पर “कम्प्यूटराईजेशन हेतु छूटे हुए जमाबंदी का डिजिटाईजेशन” चुनकर आवेदन दीजिए। अंचलाधिकारी जाँच के बाद उसे ऑनलाइन करते हैं।

लगान का पैसा कट गया और रसीद नहीं आई, क्या करें?

दोबारा भुगतान मत कीजिए। भू-लगान पोर्टल पर “लंबित भुगतान देखें” में Transaction ID से Verify कीजिए। ID न हो तो अपनी जमाबंदी खोजकर “पिछला भुगतान देखें” से निकालिए।

जमीन की मापी की फीस कितनी है?

प्रति खेसरा ग्रामीण क्षेत्र में ₹500 और नगर निगम, नगर परिषद या नगर पंचायत क्षेत्र में ₹1000। तत्काल मापी में ग्रामीण ₹1000 और शहरी ₹2000 (ई-मापी FAQ)।

क्या जमाबंदी को दाखिल-खारिज से “लॉक” कर सकते हैं?

नहीं, FAQ के अनुसार ऐसा नियम नहीं है। SMS अलर्ट चुनिए और गलत दाखिल-खारिज चलता दिखे तो आपत्ति दर्ज कीजिए।

दाखिल-खारिज खारिज हो जाए तो क्या करें?

पहले आदेश में लिखा कारण देखिए। अधिनियम के अनुसार अस्वीकृति के आधार आदेश में लिखे जाते हैं और आवेदक को बताए जाते हैं। आदेश से संतुष्ट न हों तो आदेश के 30 दिन के भीतर भूमि सुधार उप समाहर्ता (DCLR) के यहाँ अपील कर सकते हैं।

Bihar Bhumi का हेल्पलाइन नंबर क्या है?

विभाग की टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-345-6215 बताई गई है। तकनीकी दिक्कत के लिए पोर्टल का Raise a Ticket भी है।

आधिकारिक लिंक

इस लेख में क्या बदला

  • 9 अक्टूबर 2026: लेख पहली बार छपा। सेवाओं की सूची और लिंक पोर्टल के होम पेज से, प्रक्रिया विभाग की पुस्तिका (V1.1) से, और शुल्क, समय-सीमा और नियम पोर्टल के FAQ पन्नों तथा दाखिल-खारिज अधिनियम, 2011 के राजपत्र-पाठ से मिलाए गए। जुलाई 2026 की दो खबरें अलग से, स्रोत के साथ दी गई हैं।

इस लेख की सीमाएँ: हमने आवेदन खुद पोर्टल पर जमा करके नहीं देखे; जानकारी आधिकारिक दस्तावेज़ों और पोर्टल के पन्नों से ली गई है। पोर्टल के मेनू के नाम बदलते रहते हैं। अधिनियम की बातें 2011 के राजपत्र-पाठ (2012 के संशोधन समेत) से हैं; बाद के संशोधन अंचल कार्यालय या राजपत्र से देख लीजिए। यह कानूनी सलाह नहीं है।

सूचना: allvacancyalert.com कोई सरकारी वेबसाइट नहीं है और इसका बिहार सरकार या राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग से कोई संबंध नहीं है। हम सिर्फ़ जानकारी देते हैं। आवेदन हमेशा ऊपर दिए आधिकारिक पोर्टल पर ही कीजिए। नियमों और शुल्क में बदलाव हो सकता है, इसलिए आवेदन से पहले पोर्टल या अपने अंचल कार्यालय से पुष्टि कर लीजिए। अधिक जानकारी के लिए हमारा Disclaimer पढ़ें। कोई जानकारी गलत या पुरानी लगे तो हमें बताएँ।

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